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अध्याय ७

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झिनतुन जो अब चिनहट का प्रधान मंत्री था, उसे १% क्लब के साथ-साथ ९९% क्लब के बीच भी एक क्रूर विस्तारक के रूप में जाना जाता था. उसे क्रूरता के जीते-जागते प्रमाण के रूप में पहचाना जाता था. इसलिए वे चौबीसों घंटे उसके खौफ में जीते थे. झिनतुन का बचपन ही उसके इस रूप का कारण था. वयस्कता में प्रवेश करने से पहले वह एक छोटे शहर की अत्यंत गरीब बस्ती में रहता था. वह हमेशा आस-पास के समृद्ध पड़ोस वाले बच्चों और बड़ों द्वारा उपेक्षा की दृष्टि से देखा जाता था. झिनतुन को अपने ८० वर्ग फुट के कमरे से नफरत थी. “मैं अपने लिए पूरी दुनिया चाहता हूँ. मुझे यहाँ घुटन महसूस होती है.” वह अकेले में रोता था. उसका मन लगातार इस विलक्षण महत्वाकांक्षा को प्राप्त करने के चिंतन में व्यस्त रहता था. हालाँकि वह कभी किसी स्कूल में नहीं गया, लेकिन उसने अपने खुद के प्रयासों से पढ़ना सीखा. जल्द ही वह एक संजीदा वाचक बन गया. उनके पसंदीदा विषयों में शामिल थीं वे सब पुस्तकें जिनमे अमीर, शक्तिशाली और प्रसिद्ध कैसे बना जाये इसके गुर लिखे थे. जैसे-जैसे वह अपनी किशोरावस्था के करीब आता गया, जीवन के प्रति स्पष्टता अचान...

अध्याय ६

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चिनहट बर्थ ग्रह के पश्चिमी गोलार्ध में दषस्थान नामक देश का पड़ोसी देश है. दोनों देश सदियों से गरीबी में झूझ रहे थे. लेकिन अब पिछले एक दशक से इन देशों के हालात सुधरते जा रहे थे. दोनों देशों ने समाजवादी आदर्शवाद का पालन किया. दषस्थान ने छद्म लोकतंत्र का सहारा लेकर और चिनहट ने एक पार्टी के शासन की आड़ में समाजवाद का अनुसरण किया. चिनहट में एक तरह की सामूहिक तानाशाही थी जहाँ कुछ गिने-चुने लोगों का गिरोह अपनी मनमानी से देश को चलाता था. इस समाजवादी आदर्शवाद ने दषस्थान और चिनहट में लगभग १% आबादी को अत्यंत धनवान बनाया. बाकी ९९% केवल मामूली रूप से बेहतर थे और इनमे से कई तो पहले की तुलना में गरीब हो गए थे. जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय के आँकड़े अक्सर एक गलत तरीके से लोगों की आर्थिक तस्वीर को चित्रित करते थे जैसे कि हर कोई बहुत ही खुशहाली का जीवन जी रहा हो. अधिकांश देशों के लिए यही कहानी लागू होती थी. यहाँ तक कि जिन देशों में पूंजीवाद या राजतंत्र प्रचलित था, वहाँ की कहानी भी इससे अलग नहीं थी. चिनहट के प्रधान मंत्री झिनतुन १% क्लब से वास्ता रखते थे. वह इस वक्त दषस्थान की आधि...